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Normal Delivery In Hindi – नार्मल डिलीवरी कैसे होती है संपूर्ण जानकारी

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Normal Delivery In Hindi के इस आर्टिकल में आपको यह पता लग जायेगा की नार्मल डिलीवरी कैसे होती है (delivery kaise hoti hai), नार्मल डिलीवरी के लिए टिप्स (normal delivery tips in hindi) और नार्मल डिलीवरी से जुडी संपूर्ण जानकारी .

एक नन्हे मुने शिशु को जन्म देना हर एक लड़की और औरत के लिए एक सपना होता है . ऐसे में गर्भवस्था दरमियान हमेशा उनके मन में एक ही सवाल गूंजता है की उनको कैसे पता चलेगा डिलीवरी नार्मल होगा कि सिजेरियन ?

ज्यदातर डॉक्टर्स महिलाओ को normal delivery (सामान्य प्रसव) करने की ही सलाह देते है पर आजकल की lifestyle के अनुसार लडकिया C-section ( सिजेरियन ) करवाना ज्यादा पसंद करती है . पर महिलाओ को हो सके उतना नार्मल डिलीवरी के लिए प्रयत्न जरुर करना चाहिए .

Normal Delivery In Hindi - नार्मल डिलीवरी कैसे होती है संपूर्ण  जानकारी

तो चलिए अब ये जान लेते है की,

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नार्मल डिलीवरी क्या है

यह एक ऐसी कुदरती प्रसव प्रक्रिया है जिसमे महिलाये अपने योनिमार्ग से गर्भ में पल रहे शिशु को जन्म देती है . इस डिलीवरी में कोई भी ऑपरेशन नहीं किया जाता . बिलकुल natural तरीके से बच्चे को जन्म दिया जाता है . जिन भी महिलाओ को कोई भी medical समस्या ना हो उनको नार्मल डिलीवरी हो सकती है .

Normal Delivery kaise hoti hai – नार्मल डिलीवरी कैसे होती है?

अगर आप भी जानना चाहते है की सामान्य प्रसव या Normal Delivery kaise hoti hai (Process of Normal Delivery in Hindi) तो नार्मल डिलीवरी की प्रक्रिया को 3 चरणों में बांटा गया है . इसके पहले चरणों को भी और 3 चरणों में बांटा गया है. तो आइये इन सब चरणों को बारीकी से समजते है .

1 . नार्मल डिलीवरी का पहला चरण :

लेटेंट प्रक्रिया : नॉर्मल डिलीवरी (सामान्य प्रसव) में लेटेंट की प्रक्रिया बहुत लम्बे समय तक चलती है. इसमें गर्भाशय ग्रीवा 2-3 सेंटीमीटर तक खुल सकती है. यह प्रक्रिया डिलीवरी के एक सप्ताह पहले या डिलीवरी के कुछ घंटों पहले शुरू हो सकती है. इस दौरान गर्भवती महिला को बीच-बीच में संकुचन भी हो सकते हैं.

लेटेंट प्रक्रिया से गुजर रही गर्भवती महिलाओं के लिए टिप्स :

  • आराम करें और अपना पूरा ध्यान रखें
  • थोड़ी थोड़ी देर चलती-फिरती रहें
  • खूब पानी पिएं
  • अकेली न रहें, अपने साथ किसी न किसी को जरूर रखें
  • अस्पताल जाने के लिए तैयारी शुरू कर दें
  • अपने डॉक्टर से संपर्क करें

एक्टिव (active) प्रक्रिया : एक्टिव (active) प्रक्रिया में गर्भाशय ग्रीवा 3-7 सेंटीमीटर तक खुल जाती है. इस दौरान संकुचन की वजह से तेज दर्द होता है .

ट्रांजिशन प्रक्रिया : ट्रांजिशन प्रक्रिया में गर्भाशय ग्रीवा 8-10 सेंटीमीटर तक खुल जाती है. इस दौरान संकुचन लगातार होते रहते हैं और दर्द भी बढ़ जाता है.

2. नार्मल डिलीवरी का दूसरा चरण : बच्चे का बहार आना

इस चरण में गर्भाशय की ग्रीवा पूरी तरह से खुल जाती है और संकुचन की गति और तेज हो जाती है. इस चरण में शिशु का शिर एकदम निचे की और आ जाता है . इस समय डॉक्टर्स महिला को जोर लगाने के लिए कहते है जिस से शिशु का शिर बहार आ जाता है और फिर डॉक्टर्स शिशु के बाकी के शरीर को खिंच के बहार निकल लेते है .

3. नार्मल डिलीवरी का तीसरा चरण : गर्भनाल बहार आना

शिशु के बहार आने के बाद डॉक्टर्स शिशु को गर्भनाल काट कर अलग कर देते है . तीसरे चरण में महिला के गर्भाशय में मोजूद प्लेसेंटा बहार निकलती है . शीशु के जन्म के बाद प्लेसेंटा गर्भाशय से अलग होने लगती है और इस वक्त भी महिला को संकोचन होता है . यह प्रक्रिया 30 मिनट तक चल सकती है . इसको बहार निकलने के लिए भी डॉक्टर्स महिला को खुद से जोर लगाने के लिए बोलते है .

नार्मल डिलीवरी में कितना समय लगता है?

वैसे देखा जाये तो नार्मल डिलीवरी का समय महिला की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है . अगर महिला की पहली बार डिलीवरी हो रही है तो उन्हें 8 घंटे से लेकर 20 घंटे तक हो सकता है . अगर डिलीवरी दूसरी बार हो रही है तो कम समय लगता है .

Normal Delivery ke lakshan – नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण

गर्भवती महिला को अगर कुछ खास normal delivery ke lakshan (डिलीवरी होने के लक्षण) दिखाई देते है तो हो सकता है उनकी नार्मल डिलीवरी हो . कुछ ऐसे संकेत (normal delivery symptoms ) महिला को अपने 9 वे महीने के अंत में (9 महीने में डिलीवरी लक्षण) या प्रसूति से 2 हप्ता पहले दिखाई देते है जिनसे उनको अंदाजा लग सकता है की उनकी नार्मल डिलीवरी होगी . हर महिला में प्रेग्‍नेंसी के लक्षण और समस्‍याएं भी अलग होती हैं इस‍लिए नार्मल डिलीवरी के लक्षण और संकेत भी अलग अलग हो सकते हैं।

आइये जानते है क्या है वो Normal Delivery ke lakshan – नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण और संकेत

  • प्रेगनेंसी के 34 से लेकर 36 वे सप्ताह में बच्चे का शीर निचे की तरफ आने लगे तो ये नार्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ा देता है .
  • शिशु निचे आने के बाद महिला के balder और uterus पर दबाव डालता है और बार बार पेशाब जाना पड़ता है जिस से उनको शिशु के निचे आने का पता लगता है .
  • भ्रूण निचे की और आने से महिला को उठने बेठने और चलने फिरने में परेशानी होने लगती है तो भी भ्रूण निचे की और खिसक रहा है और सामान्य प्रसूति का अंदाजा लगाया जा सकता है और यह नॉर्मल डिलीवरी का लक्षण हो सकता है .
  • नार्मल डिलीवरी होने से पहले महिला को हल्का सा दर्द होने लगता है जिसे यह अंदाजा लग सकता है की डिलीवरी नार्मल होगी .
  • पीठ के निचले हिस्से में और जोड़ो और मासपेशिओ में खिचाव आने से दर्द होना .
  • गर्भाशय की ग्रीवा का धीरे धीरे खुल जाना औए चौड़ा हो जाना जो डॉक्टर्स को examination के दौरान पता चलता है .
  • जब नार्मल डेलिवरी होने वाली होती है तो गुदा मार्ग की मासपेशिया लचकीली बन जाती है और पतला मल आना शुरू हो जाता है .

डिलीवरी के कुछ दिन पहले दिखने वाले लक्षण – (delivery symptoms in hindi)

  • वजायनल डिस्चार्ज ज्यादा होना
  • संकुचन का बढ़ जाना और कभी कभी तेज होना
  • दर्द और खिचाव पीठ से लेकर पैर तक पहुच जाना
  • Amniotic fluid की थेली फटने से पानी का छुटना

एडवांस (Advance) लेबर के लक्षण और संकेत

  • पेट में गर्मी महेसुस होना
  • संकुचन तेजी से होना और दर्द का बढ़ जाना
  • पानी का शुरू हो जाना
  • योनी से खून का आना
  • पीठ और कमर में तेज दर्द होना

Normal Delivery ke upay – नार्मल डिलीवरी के उपाय (normal delivery k liye kya kare)

नार्मल डिलीवरी की संभावना को बढाने के लिए महिला को अपनी प्रेगनेंसी के शुरू से लेकर अंत तक कुछ चीजो का विशेष ख्याल रखना पड़ता है . यहाँ पर आपको जो भी Normal Delivery ke upay – नार्मल डिलीवरी के उपाय बताये गए है अगर आप इन सब का अच्छे से ध्यान रखते हो तो आपकी नार्मल डिलीवरी की संभावना काफी बढ़ जाएगी .

  • जब आपको प्रेगनेंसी टेस्ट किट के द्वारा प्रेगनेंसी टेस्ट करके पता चले की आप pregnant हो तब से आपको एक अच्छे gynecologist के पास जाकर दिखाना चाहिए और उनकी सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या का पालन करना चाहिए .
  • अपनी प्रेगनेंसी में healthy diet को शामिल करे जिनसे आपको नार्मल डिलीवरी करने के लिए शरीर में ताकत मिले .
  • प्रेगनेंसी के दौरान आयरन और कैल्शियम की मात्रा का खास ख्याल रखे. क्युकी आपको उस वक्त आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में चाहिए होता है और यह नार्मल डिलीवरी में भी लाभदायक है .
  • गर्भावस्था के पहले महीने से अंतिम महीने तक अपनी स्थिति के अनुसार योग और व्यायाम करे . नियमित योग और व्यायाम करने से आपके नार्मल डिलीवरी के chances 80 % बढ़ जाते है .
  • pregnant औरत को हररोज थोड़ी देर के लिए walking जरुर करना ही चहिये यह न सिर्फ आपकी नार्मल डिलीवरी में लाभदायी है बल्कि यह बच्चे का IQ level भी बढाता है .
  • अगर गर्भावस्था के दौरान आपके डॉक्टर्स कोई भी दवाइया पीने की सलाह देते है तो उनको अवश्य पिए.
  • महिला को शराब और बाकि के alcoholic पदार्थो से दूर रहना चाहिए . यह समय से पहले डिलीवरी का कारण बन सकता है .
  • गर्भवती महिला को रोजबरोज के घर के कम करते रहने चाहिए जिनसे उनका वजन भी नियंत्रित रहेगा और स्नायुओ लचीले रहने से सामान्य प्रसूति की संभावना भी बढ़ेगी .
  • pregnant महिला को हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और अपना मनोबल मजबूत रखना चाहिए क्युकी यह दोनों नार्मल डिलीवरी के लिए बेहद जरूरी है .
  • अगर औरत अपनी गर्भावस्था में जरुरत से ज्यादा आराम करे तो उनकी नार्मल डिलीवरी की संभावना कम हो जाती है .
  • जरुरत से ज्यादा भारी चीजे न उठाये क्युकी इनसे आपकी premature delivery हो सकती है और हो सकता है की उनके लिए cesarean भी करना पड़े .
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला ज्यादा देर तक खड़ी न रहे इस बात का खास ध्यान रखना होता है .
  • पूरी गर्भवस्था के दौरान महिला को अपने वजन पर नियंत्रण रखना चाहिए न तो जरुरत से ज्यादा वजन और न ही कम वजन होना चाहिए .

यह थी normal delivery tips in hindi जो आपको नार्मल डिलीवरी कराने में बहुत ही मदद करेगी .

नॉर्मल डिलीवरी (सामान्य प्रसव) की संभावना को बढ़ाने के लिए 9 टिप्स – normal delivery tips in hindi

यहा पर आपको कुछ टिप्स दी गई है जिनका अगर कोई भी गर्भवती महिला पालन करती है तो उनकी नार्मल डिलीवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है .

1. सही डॉक्टर से दिखाए

महिला को अगर सामान्य प्रसव (normal delivery) करनी है तो सबसे पहले अच्छे और सही doctor को चुनना चाहिए जो महिला के शरीर की स्थिति को समज के उन्हें नार्मल डिलीवरी के लिए पहले से ही guide करे .

2. तनाव से दूर रहे

नार्मल डिलीवरी करना चाहने वाली औरतो को हमेशा तनाव से दूर रहना चाहिए और बार बार प्रसूति के बारे में नहीं सोचना चाहिए .

3. अपनों के साथ रहे

अपनों का साथ हमेशा एक गर्भवती स्त्री के लिए जरूरी होता है और यह साथ उनको emotionally strong बनाता है .

4. हमेशा positive सोचे

अपनी प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला को सकारात्मक सोच रखनी चाहिए इस लिए negative विचारो से दूर रहे .

5. सामान्य प्रसव के बारे में सही जानकारी रखे

आप अगर नार्मल डिलीवरी करना चाहती है तो प्रसव के बारे में सही जानकारी ले. इस जानकारी से आपको डिलीवरी करने में काफी सहायता मिलेगी . लोगो की डराने वाली बातो से दूर रहे क्युकी हर महिला का अनुभव अलग अलग होता है .

6. खुद को हाइड्रेट रखे

गर्भावस्था में महिला को हमेशा पानी और जूस पीते रहना चाहिए क्युकी गर्भ में पानी की कमी की वजह से लेबर के समय पानी की कमी हो सकती है .

7. अपने उठने बेठने की स्थिति का ख्याल रखे

महिला को अपनी प्रेगनेंसी के दौरान सही से उठना बेठना और सोना चाहिए . क्युकी यह सब आपके शिशु पर असर करता है इस लिए महिला जब भी बेठे तो अपनी पीठ को सहारा जरुर दे.

8. शरीर के निचले हिस्से की मालिश करे

महिला चाहे तो गर्भावस्था के 7 वे महीने के बाद अपने शरीर के निचले हिस्से की मालिश जरुर करे इस से उन्हें प्रसव के समय पर आसानी रहती है .

9. नियमित व्यायाम करे

गर्भवती महिला को अपनी प्रेगनेंसी के शुरुआत से लेकर अंत तक व्यायाम जरुर करना चाहिए जिनसे उन्हें normal delivery करने में मदद हो .

प्रेगनेंसी योगा फॉर नार्मल डिलीवरी – yoga for normal delivery

yoga - Normal Delivery ke upay - नार्मल डिलीवरी के उपाय

यहाँ पर आपको कुछ yoga for normal delivery in hindi बताये गए है जिनको आप अपने रुटीन में शामिल करते हो तो आपकी नार्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है .

1. कोणासन

2. वज्रासन

3. बुद्ध कोणासन

4. त्रिकोणासन

5. शवासन

6. ताड़ासन

7. उत्कटासन 

8. वीरभद्रासन

9 month pregnancy exercise for normal delivery in hindi – normal delivery ke liye exercise

यहाँ पर आपको कुछ exercise बताई गयी है जिनसे आपको normal delivery करने में काफी सहायता मिलेगी .

1. बटरफ्लाई एक्सरसाइज (butterfly exercise)

कोई भी ऐसी exercise जो महिला के pelvic area को खोलने का काम करती है वो महिला की सामान्य प्रसव के लिए लाभदायी होती है. ऐसी ही एक कसरत है बटरफ्लाई जिनसे pelvic area open होता है और वह की माशपेशिया लचीली बनती है .

2. किगल एक्सरसाइज

किगल एक्सरसाइज नार्मल डिलीवरी में बहुत मदद करती है क्युकी यह आपके पेल्विक फ्लोर माशपेशियो को active और strong बनाती है .

3. walking (चलना)

प्रेगनेंसी के समय में पैदल चलने से बहुत से लाभ होते है . महिला का ब्लड प्रेशर नार्मल रहेता है और बच्चे को निचे के हिस्से में आने में आसानी रहती है जिस से नार्मल डिलीवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है .

4. घर के कामकाज करना

घर के कम करने से महिला active रहती है और उनको उर्जा मिलती रहती है और उनके muscles लचीले रहते है . जिनसे उन्हें अंत में सामान्य प्रसूति करने में मदद मिलती है . पर महिला जो भी कम करे वो खुद को थकाते हुए ना करे और जोर से ना करे इस बात का ध्यान जरुर रखे .

नॉर्मल डिलीवरी में कितना दर्द होता है?

नार्मल डिलीवरी का दर्द हर महिला के लिए अलग अलग होता है और यह उनकी शारीरक और भावनात्मक (मानसिक) स्थिति पर आधार रखता है .

नार्मल डिलीवरी क्यों करनी चाहिए?

नार्मल डिलीवरी करने से माँ और शिशु दोनों को बहुत से लाभ होते है और यह निचे दिए गए है .

नार्मल डिलीवरी से माँ को होने वाले लाभ

  • डिलीवरी के बाद recover होने में बहुत समय नहीं लगता .
  • माँ अपने नवजात शिशु को तुरंत ही स्तनपान करवा सकती है.
  • नार्मल डिलीवरी में कोई भी operation या काट फाट नहीं होती इस लिए माँ के शरीर को कोई नुकशान नहीं होता.

नार्मल डिलीवरी से शिशु को होने वाले लाभ

  • सिजेरियन डिलीवरी होने पर शिशु माँ को जल्द नहीं मिल पाता जबकि नार्मल डिलीवरी में शिशु माँ को तुरंत ही मिल पाता है .
  • बच्चे को माँ का दूध जल्द मिल जाता है . इस से उनके बीमार होने का खतरा भी कम हो जाता है .

तो यह थी Normal Delivery In Hindi के बारे में संपूर्ण जानकारी की नार्मल डिलीवरी कैसे होती है (Normal Delivery kaise hoti hai), क्या होते है normal delivery ke lakshan, normal delivery ke upay, normal delivery tips in hindi, yoga for normal delivery.

उम्मीद है की आपको इस आर्टिकल से नार्मल डिलीवरी (normal delivery) को समजने में काफी सहायता मिली होगी .

अगर आपको यह जानकारी से लाभ मिला है तो हमें comment में बताये और अधिक जानकारी के लिए हमारे दुसरे आर्टिकल भी पढ़े :

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